जप माला में 108 मनके क्यों होते हैं
ज़्यादातर जप मालाओं में 108 मनके होते हैं, और एक माला पूरी करने का मतलब है 108 बार नाम लेना। यह संख्या क्यों, इसकी कई व्याख्याएँ परंपरा में चली आ रही हैं। यह पेज वे व्याख्याएँ और माला से गिनने का तरीका बताता है।
108 ही क्यों
इसका कोई एक उत्तर नहीं है। अलग-अलग परंपराएँ अलग कारण बताती हैं। सबसे ज़्यादा सुनी जाने वाली व्याख्याएँ ये हैं:
- नक्षत्र: ज्योतिष में 27 नक्षत्र हैं, और हर नक्षत्र के 4 चरण। 27 × 4 = 108।
- राशि और ग्रह: 12 राशियाँ और 9 ग्रह। 12 × 9 = 108।
- पूर्णता की संख्या: 1, 0 और 8 को कुछ लोग एक, शून्य और अनंत से जोड़ते हैं।
ये मान्यताएँ हैं, नियम नहीं। जप के लिए इतना जानना काफ़ी है कि 108 की गिनती सदियों से चली आ रही है, और एक माला जप की एक पूरी इकाई है, जिसे आसानी से गिना जा सकता है।
सुमेरु मनका
माला में 108 मनकों के अलावा एक बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु या गुरु मनका कहते हैं। जप उसके पास वाले मनके से शुरू होता है। परंपरा के अनुसार सुमेरु को लाँघा नहीं जाता: माला पूरी होने पर उसे पलटकर उल्टी दिशा में फिर से शुरू करते हैं।
माला से गिनती कैसे करें
- माला को दाएँ हाथ में लें, सुमेरु के पास वाले मनके से शुरू करें।
- हर नाम या मंत्र पर अंगूठे और बीच की उँगली से एक मनका अपनी ओर सरकाएँ। परंपरा में तर्जनी (पहली उँगली) से माला नहीं छूई जाती।
- 108 मनकों के बाद सुमेरु आने पर एक माला पूरी होती है।
- कितनी मालाएँ हुईं, यह याद रखने के लिए कई लोग अलग से छोटी गिनती माला या कागज़ रखते हैं।
फ़ोन पर 108 की माला
सीताराम ऐप में हर टैप एक मनका है, और 108 टैप पर एक माला पूरी होती है। यह असली माला की तरह चलता है:
- अधूरी माला बंद करने पर खो नहीं जाती। अगली बार, अगले दिन भी, वहीं से आगे बढ़ती है। गिनती “61 / 108” की तरह दिखती है।
- पूरी हुई हर माला का निशान दृश्य में रहता है: रामसेतु पर दीया, यमुना में खिला कमल, कैलाश पर दीपक।
- “मेरा जाप” में आज की, अब तक की और पिछले 30 दिनों की गिनती दिखती है। चाहें तो रोज़ 1, 3, 5 या 11 मालाओं का लक्ष्य रख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या 108 से कम या ज़्यादा जप कर सकते हैं?
- हाँ। 108 एक सुविधाजनक गिनती है, बंधन नहीं। कुछ लोग 27 या 54 मनकों की छोटी माला भी इस्तेमाल करते हैं।
- ऐप में माला कब पूरी मानी जाती है?
- आपके हर 108वें जप पर, चाहे वह किसी भी दिन हुआ हो। इसीलिए कभी-कभी “आज” की गिनती 108 से कम होने पर भी माला पूरी हो जाती है।